कॉलेज के वे दिन
कॉलेज के वे दिन
चित्र गूगल से साभार केवल कॉलेज परिवेश दर्शाने कोजीवन की सबसे मधुर स्मृतियों में यदि किसी कालखंड का विशेष स्थान होता है, तो वह निस्संदेह कॉलेज जीवन है। यह वह समय होता है, जब किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज़ पर कदम रखते हुए सपनों को नई उड़ान मिलती है। स्वतंत्रता का एहसास, नए मित्र, नए अनुभव, पढ़ाई, शरारतें, भविष्य की योजनाएँ और जीवन के प्रति उमंग—ये सभी मिलकर ऐसे सुनहरे पल रचते हैं, जो समय बीत जाने के बाद भी स्मृतियों में सदैव जीवंत बने रहते हैं। प्रस्तुत संस्मरण उसी अविस्मरणीय कॉलेज जीवन की सहज, रोचक और आत्मीय झलक प्रस्तुत करता है।
संस्मरण
स्कूल के कठिन अनुशासन से निकलकर जब कॉलेज पहुँचे, तो ऐसा लगता था मानो खुले आसमान में उड़ने के लिए पंख मिल गए हों।
रंग-बिरंगे फैशनेबल कपड़े, मैचिंग बैग, अपनी निजी गाड़ी से कॉलेज आना, मन हुआ तो कक्षा में बैठ गए और मन नहीं हुआ तो पहली बार जाना कि 'जनरल बंक' भी कोई चीज़ होती है।
लेकिन कुछ ही महीनों बाद वास्तविकता का एहसास होने लगा। लगा कि पढ़ाई में शायद पीछे छूट रहे हैं। फिर शुरू हुई खास दोस्तों से नोट्स लेने-देने की कवायद और कंबाइंड स्टडी का सिलसिला। क्या दिन थे! पढ़ना, थक जाना, साथ बैठकर खाना, थोड़ा आराम करना और फिर पढ़ाई में जुट जाना—सब कुछ कितना सहज और आनंददायक था।
उस समय न मोबाइल का आकर्षण था, न व्हाट्सऐप, न सोशल मीडिया, न रील्स और न ही चैट का मोह। मन में केवल एक ही जुनून रहता था—कुछ बन जाने का और कुछ कर दिखाने का।
हम बायोलॉजी साइंस के विद्यार्थी थे और साहित्यिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। मेडिकल प्रवेश परीक्षा एक बार दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उसी अध्याय को वहीं विराम दे दिया।
बी.एससी. करने के बाद अंग्रेज़ी साहित्य की तैयारी कर रहे थे कि तभी अपने गृह नगर में लॉ कॉलेज खुल गया। बिना देर किए प्रवेश ले लिया और डॉक्टर के सफेद कोट के स्थान पर वकील का काला कोट धारण करने का निर्णय कर लिया।
लॉ कॉलेज की कक्षाएँ रात्रि में होती थीं। सर्दियों के दिनों में प्रोफेसर सहित पूरी कक्षा का किसी टपरी पर बैठकर गरमा-गरम चाय और पकौड़ों का आनंद लेना आज भी स्मृतियों में वैसा ही ताज़ा है।
कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है कि कॉलेज जीवन की वे सुनहरी यादें कभी भुलाई नहीं जा सकतीं। वे जीवन की ऐसी अमूल्य धरोहर हैं, जो समय के साथ और भी अधिक मूल्यवान होती जाती हैं तथा जीवन भर हमारे साथ बनी रहती हैं।
सूचना स्रोत
एड. सुषमा अग्रवाल, नागपुर (महाराष्ट्र)
संस्मरण से सीख
* कॉलेज जीवन केवल शिक्षा प्राप्त करने का समय नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण पाठशाला भी है।
* युवावस्था का उत्साह तभी सार्थक बनता है, जब उसमें अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी जुड़ा हो।
* असफलता जीवन का अंत नहीं होती; वह अक्सर नई दिशा और नए अवसरों का द्वार खोलती है।
* सच्चे मित्र, साझा अध्ययन और गुरुजनों का स्नेह जीवन की सबसे मूल्यवान पूँजी होते हैं।
* तकनीकी साधनों से दूर रहकर लक्ष्य पर केंद्रित रहने का जो आनंद और एकाग्रता उस समय थी, वह आज भी प्रेरणा देती है।
* जीवन के सुनहरे पल कभी लौटकर नहीं आते, किंतु उनकी मधुर स्मृतियाँ जीवन भर प्रेरणा, संतोष और मुस्कान का स्रोत बनी रहती हैं।
स्रोत
पाठ्य विस्तार और प्रस्तुति









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